Bitcoin kaise banta hai – Bitcoin की पूरी जानकारी

आज से कुछ साल पहले अगर आपने लगभग 2009 या 10 के आसपास बिटकॉइन में ₹100 भी लगाए होते तो आज के जमाने में है आपके पास करोड़ो रुपए होते। इस बात से क्या आपको यह ख्याल आया क्या फ्री बिटकॉइन क्या होता है Bitcoin kaise banta hai इसलिए के साथ जुड़े रहिए हम आपको समझा नहीं जा रहे हैं कि बिटकॉइन क्या होता है और इसका हमारे बीच चलन किस प्रकार शुरू हुआ। 

Bitcoin kaise banta hai

बिटकॉइन क्या होता है

सरल भाषा में कहें तो बिटकॉइन एक डिजिटल करेंसी होती है। अब अगर आप यह सोच रहे हैं कि डिजिटल करेंसी है तो इस करेंसी का इस्तेमाल करके आप कोई सामान खरीद सकते है क्या? तो बात है कि हां अब बिटकॉइन का इस्तेमाल करके विभिन्न प्रकार की चीजें खरीद सकते है बस अर्थ है बिटकॉइन को भुगतान के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए कुछ इंस्टीट्यूट इसे स्वीकार करते है और कुछ नहीं करते। 

बिटकॉइन कोई ठोस वस्तु नहीं है यह मोबाइल के अंदर मौजूद एक करेंसी है जिसका इस्तेमाल करके आप किसी से वाया वस्तु को खरीद सकते है अगर आपके खरीदने वाले के पास बिटकॉइन एक्सेप्ट किया जा रहा हो। बिटकॉइन बिटकॉइन माइनर के द्वारा बनाया जाता है और इसे खरीदने पर आपको एक एड्रेस दिया जाता है जो एड्रेस किसी एक बिटकॉइन ट्रांजैक्शन का होता है। 

अगर अभी अब बिटकॉइन के बारे में अच्छे से नहीं समझ पाए हैं तो इसकी इतिहास और काम करने के तरीके के बारे में नीचे पढ़े। 

बिटकॉइन का इतिहास

बिटकॉइन की शुरुआत 2009 में हुई अचानक इंटरनेट पर किसी जापानी व्यक्ति ने एक डॉक्यूमेंट पब्लिश किया जिसमें बिटकॉइन के पूरे तरीके का जिक्र किया गया था इस डॉक्यूमेंट को लिखने वाले ने अपना नाम सतोशी नाकामुरा बताया। उस दिन के बाद से यह पता नहीं चल पाया कि आखिर यह सतोशी नाकामोरो कौन है हम बस इस नाम को इस उम्मीद से जानते है कि इस सी नेम बिटकॉइन की स्थापना की। 

अगर आप यह सोच रहे हैं कि सतोशी नाकामोतो को बिटकॉइन शुरू करने की क्या आवश्यकता पड़ी तो आपको बताते हैं कि आज से बहुत साल पहले हमारे बीच सोना और चांदी देकर के सामान खरीदा जाता था। बाद में सरकार आई और सरकार ने पैसे का चलन शुरू किया। जैसे-जैसे वक्त बदला हमें डिजिटल भुगतान करने की आवश्यकता पड़ी। 

अब जब हम पैसे को डिजिटल ही किसी को देते हैं तो हमारे खाते से पैसा कट जाता है और सामने वाले के बैंक खाते में पैसा चला जाता है इस प्रक्रिया में बैंक हमारे ट्रांजैक्शन की सारी जानकारी को रखता है। अर्थात बैंक इस बात का ध्यान रखता है कि पैसे देने वाले के अकाउंट से इतना पैसा कट है और लेने वाले के अकाउंट में उतना पैसा जुड़े। 

बस यहीं से सतोसी नाम के एक व्यक्ति के दिमाग में ख्याल आया कि आखिर यह बैंक हमारे पैसों की जानकारी क्यों रखता है हम अगर इस बैंक को हटा दें तो क्या हम अपना काम नहीं कर सकते? 

जवाब के रूप में सतोशी नाकामोतो ने बिटकॉइन की स्थापना की और बिटकॉइन एक ऐसा पैसा बना जिसे हम किसी को देते है तो इसकी जानकारी कोई एक व्यक्ति या संस्था नहीं रखती।  बिटकॉइन को बनाते हो आप इस बात का खास रुप से ध्यान रखा गया कि बिटकॉइन के ट्रांजैक्शन जानकारी किसी एक संस्था के पास ना जाए इसका पूरा ट्रांजैक्शन बड़े लेवल पर होता है जिसके लिए हजारों कंप्यूटर और लाखों की खपत लगती इसे बचाने के लिए Bitcoin miners का कांसेप्ट लाया गया। 

बिटकॉइन मेनर्स को एक एक खास काम दिया गया कहने का अर्थ यह है कि बिटकॉइन के साथ एक काम बताया गया कि अगर विश्व में कोई भी व्यक्ति बिटकॉइन में हो रहे ट्रांजैक्शन की जानकारी एक जगह एकत्रित करता है तो अपने आप उसके अकाउंट में एक बिटकॉइन आ जाएगा 2009 से 2012 के आसपास जब बिटकॉइन नया-नया हमारे बीच आया था तब हम 2 से 3 दिन के अंदर इसके ट्रांजैक्शन आईडी को एकत्रित करके एक बिटकॉइन बना सकते थे मगर आज के समय में इतने बड़े लेवल पर इसकी ट्रांजैक्शन हो चुकी है कि हमे 1 बिटकॉइन माइन करने में सौ से डेढ़ सौ साल का वक्त लग जाएगा। 

 Bitcoin kaise banta hai

देखिए अगर हम यह कहें कि बिटकॉइन बनाने की प्रक्रिया में आपको बस ट्रांजैक्शन आईडी की मदद से बिटकॉइन माइन करना है तो पूरी दुनिया बिटकॉइन माइंड करने लग जाएगी और हमारे बीच खूब सारा बिटकॉइन हो जाएगा। बिटकॉइन बनाने वाले ने इस बात का भी बखूबी ध्यान रखा है और उसने अपने पब्लिक डॉक्यूमेंट में इस बात को बड़ी बारीकी से बताया है कि आप चाहे कितना भी बिटकॉइन माइन कर ले 21 मिलियन के बाद बिटकॉइन जनरेट नहीं हो सकता। 

अब पूरी दुनिया को पता है कि केवल 21 मिलियन बिटकॉइन ही हमारे पास आ सकता है इस वजह से इसकी डिमांड और तेजी से बढ़ने लगी और बिटकॉइन के ट्रांजैक्शन आईडी की सहायता से उसे माइन करने की प्रक्रिया मुश्किल होती चली गई जितनी ज्यादा प्रक्रिया मुश्किल होगी हमें उतना ही ज्यादा बिटकॉइन बनाने के लिए खर्च करना होगा, जिस वजह से बिटकॉइन बनने की प्रक्रिया स्लो हो गई।  

सरल भाषा में जितने भी बिटकॉइन का ट्रांजैक्शन होता है उसकी आईडी या ट्रांजैक्शन एड्रेस का इस्तेमाल करके हम एक नया बिटकॉइन बना सकते हैं इस सारे ट्रांजैक्शन को एकत्रित करने के लिए खूब सारा कंप्यूटर और हाई स्पीड इंटरनेट की जरूरत होती है जिसके लिए बिटकॉइन माइनर खर्च करते है और बिटकॉइन बनाने का कार्य करते हैं। 

जैसे-जैसे बिटकॉइन की डिमांड बढ़ेगी वैसे वैसे बिटकॉइन बनाने की प्रक्रिया स्लो और मुश्किल होती जाएगी। 

निष्कर्ष

उम्मीद करते हैं इस लेख को पढ़ने के बाद अब बिटकॉइन क्या है बिटकॉइन हमारे बीच कैसे आया और बिटकॉइन बनने की प्रक्रिया को विस्तार पूर्वक समझाइए होंगे। अगर इस लेख के जरिए Bitcoin kaise banta hai इस बात को आप समझ पाए हैं तो इसे अपने मित्रों के साथ साझा करें और अपने विचार हमें कमेंट करके बताना ना भूलें। 

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