Essay on onam ओणम पर निबंध

हमारे देश की संस्कृति के सामान इस संपूर्ण विश्व में कोई भी अन्य संस्कृति नही है। इसकी मुख्य विशेषता विविधता में एकता होती है। भारत को पर्व व त्योहारों का देश भी कहा जाता है। यहां भारत की भूमि पर साल के 12 महीने सभी धर्मों के अलग-अलग त्यौहार उत्सव आयोजित होते ही रहते हैं। सभी लोग बड़ी प्रसन्नता के साथ में इन त्योहारों को मनाते हैं।

होली, दिवाली, दशहरा,रक्षाबंधन, ईद जैसे बड़े त्यौहार जो कि पूरे देश में बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। इनमें से लोहरी, गणगौर, पोंगल, ओणम आदि त्यौहार अर्थात यह एक विशेष क्षेत्र में विशेष अपनी मान्यताओं के अनुसार ही मनाए जाते हैं। जैसे राजस्थान में गणगौर का त्योहार 16 दिन तक बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।बिहार राज्य का छठ पूजा होता है।

इसी प्रकार से हमारे दक्षिण भारत में ओणम का त्योहार सबसे बड़ा त्यौहार है। जिसको दक्षिण भारत में सभी लोग को धूमधाम के साथ मनाते हैं। यह ओणम का त्योहार केरल में 10 दिनों तक मनाया जाता है। 10 दिन तक केरल सरकार के द्वारा वहां पर राजकीय अवकाश में सभी जगहों पर घोषित कर दिया जाता है। आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से ओणम पर्व निबंध के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं…

Essay on onam ओणम पर निबंध

प्रस्तावना

भारत देश एकमात्र ऐसा देश है जो कि अनेकता में एकता वाले देश है अर्थात जहां पर अलग-अलग धर्म के लोग एक साथ प्यार प्रेम भाईचारे की भावना के साथ में रहते हैं। हमारे देश में कई तरह के त्योहार को सभी धर्मों के लोग प्रसन्नता और उत्साह के साथ में मनाते हैं, क्योंकि हमारे देश की सभ्यता और संस्कृति अपने आप में एकदम अलग और विशेष प्रकार की है।

भारत एकमात्र देश ऐसा है, यहां पर हर महीने हर दिन कोई न कोई त्यौहार सभी धर्मों में आते रहते हैं और लोग इन त्योहारों को एक साथ मनाते भी हैं। इन्हीं में से ओणम का त्योहार भी एक है। यह आज से नहीं बल्कि प्राचीन समय से मनाया जा रहा है और उनके साथ साथ चिंगम महीने में केरल में चावल की फसल का त्योहार फूलों का त्योहार भी आता है। मलयाली और केरल के लोग इस त्यौहार को बहुत धूमधाम से मनाते हैं।

ओणम क्या है?

भारत के सभी त्योहारों के नाम संस्कृत शब्द से ही लिए गए हैं और यह शब्द भी संस्कृत शब्द के श्रवणम शब्द से लिया गया है। श्रवणम शब्द 27 नक्षत्रों में एक नक्षत्र को दर्शाता है। मलयालम में फिर थिरु शब्द को भगवान श्री विष्णु के लिए उपयोग में लेते हैं। भगवान विष्णु ने वामन अवतार में महान और पराक्रमी राजा बलि के अहंकार को नष्ट करके और उससे उसका संपूर्ण राज्य दान में ले लिया था और राजा बलि को पाताल भेज दिया था। राजा बलि अहंकारी होने के साथ-साथ बहुत ही विद्वान और बलशाली राजा भी थे इसीलिए भगवान विष्णु और राजा बलि की याद के कारण ही इस त्यौहार को मनाया जाने लग जाए

पुराणों में ओणम पर्व का व्याख्यान

ओणम का त्योहार राजा महाबली की याद और उनके सम्मान के लिए मनाते हैं  लोगों का मानना है कि भगवान विष्णु के पांचवे अवतार वामन अवतार के रूप में इस धरती पर जन्म लिया था। भगवान बामन का जन्म चिंगल मास में हुआ था और यहां पर आकर राजा महाबली को उन्होंने पाताल लोक में भी भेज दिया था। ओणम का पर्व आज से नहीं बल्कि बहुत प्राचीन समय से इस भूमि पर मनाया जा रहा है। यह त्योहार राजा बलि की उदारता और उनकी समृद्धि की याद में दक्षिणी भारत के सभी लोग एक साथ धूमधाम व पूर्ण हर्सोल्लास से मनाते हैं।

ओणम पर्व का महत्व

सनातन धर्म के अंतर्गत आने वाले सभी त्योहारों का अपना एक अलग ही महत्व और उत्साह होता है। दक्षिण भारत के अधिकतर ग्रंथों में भी सनातन संस्कृति की व्याख्या का वर्णन किया गया है। लोगों ने इसको बहुत लंबे समय तक संभाल के रखा हुआ है। उन्हीं ग्रंथों में से इस महान पर्व की एक व्याख्या देखने को मिलती है। जैसा कि आप सब जानते हैं ओणम का त्योहार जगत के पालन करता भगवान श्री हरि विष्णु से जुड़ा हुआ त्यौहार है। भगवान ने अनेक अवतार लेकर पृथ्वी को पाप और भय मुक्त किया था। ओणम के महत्व के अनेक पहलू होते हैं, जैसे अति अहंकार से मानवता की हानि से व्यक्ति का खुद का ही विनाश होता है

ओणम का पर्व कैसे मनाते हैं

ओणम के त्यौहार पर सबसे पहले लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, फिर त्यौहार के लिए एक अलग ही रूप रेखा तैयार करते हैं। यह त्योहार पूरे 10 दिन तक चलता है। पहले दिन इसमें पूजा की सभी तैयारियां की जाती है। दूसरे दिन को चिथिरा कहा जाता है। पूजा के दूसरे दिन फूलों की कालीन बनाने का बड़ा महत्व है। इसको पुककल्म भी कहा जाता है। तीसरे दिन को चौधी कहते हैं।

इस दिन पुककल्म की अगली परत बनाने का काम किया जाता है। चौथे दिन को विशाकम कहते है। चौथे दिन बड़ी बड़ी प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है। पांचवें दिन को अनिजय कहते हैं इसमें नौका दौड़ प्रतियोगिता होती है। छठे दिन को थीक्रेता कहते हैं। इस दिन से दक्षिणी भारत में ओणम पर्व की छुट्टियां शुरू हो जाती है। सातवे दिन को मूलम कहा जाता है। सातवें दिन मंदिरों में विशेष प्रकार की पूजा-अर्चना होती है।

आठवें दिन को पूरादम कहा जाता है। इस दिन महाबली और बामन भगवान की मूर्ति की स्थापना होती है और उनको अलग-अलग प्रकार के फूलों से सजाया जाता है नौवें दिन ऊथ्रदोम कहा जाता है। नौवें दिन महाबली अपने राज्य में प्रवेश करते हैं। दसवीं दिन को थिरुमानम कहते हैं, जोकि ओणम का मुख्य दिन होता है। ओणम के त्यौहार के दिन में सभी लोग अपने घरों को बहुत अच्छे अच्छे प्रकार से सजाते हैं। चारों तरफ बहुत खुशी किया वातावरण छाया रहता है। लोग अपने घरों में दीप जलाते हैं, रंगोली बनाते हैं, और भगवान वामन की और राजा बलि की मूर्तियों को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया भी जाता है।

Conclusion

आज हमने इस आर्टिकल में ओणम पर्व पर निबंध लिखा है अगर आपको यह निबंध पसंद आया तो कमेंट सेक्शन में जाकर कमेंट करके आप बता सकते हैं।

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