Scaner – क्या है इसका इस्तमाल और इतिहास, जानिए पूरी जानकारी

Scaner एक ऐसा यंत्र है जो किसी भी वस्तु को डिजिटल प्रारूप में बदलता है और उसके बाद उसमें किसी भी प्रकार का संशोधन भी किया जा सकता है। आमतौर पर जितने दस्तावेज होते हैं उन्हें डिजिटल रूप में रखने के लिए स्कैन करने की आवश्यकता पड़ती है जिसके लिए स्केनर नाम के एक उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है। स्केनर आजकल विभिन्न प्रकार के आने लगे हैं आखिर इसके अंदर क्या होते हैं और उनका इस्तेमाल किस प्रकार किया जाता है इसके बारे में संपूर्ण जानकारी नीचे दी गई है।

एक ऐसा यंत्र जो किसी भी वस्तु को एक डिजिटल सिग्नल में बदल देता है और उसके बाद कंप्यूटर को इसकी जानकारी रहता है स्केनर ऐसे ही यंत्र का नाम है आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह एक बहुत पुराना यंत्र है इसके इतिहास और प्रकार की पूर्ण जानकारी के लिए इस लिस्ट के साथ अंत तक बने रहे।

scanner

Scaner क्या है

स्केनर एक खास किस्म का यंत्र होता है जो किसी जानकारी को स्कैन करके उसके प्रारूप को डिजिटल सिग्नल में बदलता है और उसके बाद इसे कंप्यूटर में स्टोर करके रखा जाता है इस सॉफ्ट कॉपी में जरूरत अनुसार किसी भी प्रकार का संशोधन भी किया जा सकता है। जब किसी कार्यालय में हमें डिजिटल जानकारी जमा करनी होती है तो हम फोटो की जगह जानकारी को स्कैन करके भेजते हैं जिससे कंप्यूटर के अंदर इस जानकारी पर कार्य किया जा सके। 

सरल भाषा में अब यह समझ सकते हैं कि एक फोटो को कंप्यूटर नहीं समझ सकता मगर स्कैन करने पर वह फोटो एक डिजिटल जानकारी बन जाती है जिसे कंप्यूटर अपनी सुविधा अनुसार इस्तेमाल कर सकता है। 

Scaner का खोज कब हुआ

किसी जानकारी को इस प्रकार से कंप्यूटर में एकत्रित करना था कि कंप्यूटर इस जानकारी पर कार्य कर सकें या संशोधन कर सकें इसलिए 1860 के दशक में सबसे पहले स्केनर का एक रूप दिखाई दिया था मगर मूल रूप से हम उसे स्केनर नहीं कह सकते थे। 

हम स्केनर को 1957 में देख पाए जब रसैल क्रश नाम के एक व्यक्ति ने अपने बेटे का फोटो लेने के लिए एक खास किस्म के यंत्र का इस्तेमाल किया है जो फोटो को इस प्रकार खींच पाया कि वह फोटो एक डिजिटल जानकारी में बदल गया और कंप्यूटर में उसके ऊपर संशोधन भी किया गया इस यंत्र को स्केनर का नाम दिया गया और इसके आविष्कार कर रसैल क्रश बने। 

स्केनर के प्रकार

आपको बता दें कि हमें एक प्रकार की जानकारी की आवश्यकता नहीं होती है और विभिन्न प्रकार की जानकारी को Scaner करके डिजिटल जानकारी में बदलने के लिए विभिन्न प्रकार के यंत्र का इस्तेमाल किया जाता है उनमें से कुछ खास प्रकार के स्केनर के बारे में नीचे बताया गया है। 

मूल रूप से स्केनर के पांच प्रकार होते हैं – 

फ्लेटेबल स्कैनर

यह एक खास किस्म का चैनल होता है जो चौड़ी और लंबी चीजों को स्कैन करने में मदद करता है जैसे किसी किताब या फोटो या दस्तावेज। 

सीट फेड स्कैनर 

यह एक खास किस्म का स्केनर होता है जिससे आप किसी ढीले ढाले कागज को स्कैन कर सकते है। पहले वाले स्केनर में आप किसी लंबी और चौड़ी चीज को स्कैन कर सकते है मगर शर्त है कि वह पूरी तरह से टाइट होनी चाहिए अगर कोई कागज खराब हो गया है या बहुत सारे कागज को एक साथ स्कैन करना होता है तो इसका इस्तेमाल किया जाता है। 

ड्रम स्कैनर

यह एक खास किस्म का स्केनर है जिसका मूलतः इस्तेमाल high-resolution में स्कैन करने के लिए किया जाता है।

प्रोडक्शन स्केनर

यह एक सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले स्केनर है इससे आप सभी तरह की चीजों को स्कैन कर सकते हैं और बाकी इसके अंदर के मुकाबले यह बड़ी तेजी से काम करता है इस वजह से बड़े-बड़े संस्थान या कार्यालय में इस तरह के स्केनर का इस्तेमाल किया जाता है। 

हैंड स्कैनर

यह एक छोटा सा स्केनर है जिसे आप अपने हाथ में उठाकर किसी क्यूआर कोड को स्कैन कर सकते है। किसी दुकान के बाहर आपने देखा होगा कि क्यूआर कोड को स्कैन करने के लिए दुकानदार इसका इस्तेमाल करते हैं आजकल कोरोना वायरस के टेंपरेचर को चेक करने के लिए भी एक हैंड इसके अंदर का इस्तेमाल किया जा रहा है। 

स्केनर और फोटो में क्या फर्क है

ज्यादातर लोगों को लगता है कि Scaner और फोटो एक जैसी चीजें है क्योंकि एस्केनर की मदद से भी हमें फोटो खींच पाते हैं और अब मोबाइल से जो फोटो खींचते हैं वह भी बिल्कुल है स्कैन के जैसा ही होता है। अगर कोई आम आदमी स्केनर और मोबाइल से खींचे हुए फोटो को देखेगा तो उसे ऐसा ही लगेगा कि एस्केनर में केवल ब्लैक एंड वाइट फोटो आती है मगर आपको बता दें कि यह पूरी तरह से गलत अवधारणा है।

पहली बात तो यह कि इसके अंदर किसी भी तरह का फोटो नहीं खींचता वह किसी भी दस्तावेज को एक डिजिटल जानकारी में बदलता है ताकि कंप्यूटर उसे देखकर समझ पाए और आदेश अनुसार आगे कार्य कर पाए अगर उसमें किसी भी प्रकार का संशोधन करना है तो कंप्यूटर उसे बड़ी आसानी से कर सकता है।

दूसरी जगह अगर आप किसी फोटो को खींचते हैं तो वह कोई डिजिटल जानकारी नहीं होती है वह बस आपके सामने रखी हुई चीज और बहू वैसी ही मोबाइल के अंदर बना दिया जाता है और इसको देखकर कंप्यूटर कुछ भी समझ नहीं सकता इसीलिए किसी भी संस्था में जब ऑनलाइन कोई काम करना होता है तो फोटो की मदद से कंप्यूटर कुछ भी समझ नहीं पाता और काम को आगे नहीं बढ़ा पता।

इन्हीं सब समस्याओं की वजह से कागज को हूबहू ड्राइंग बनाने की जगह उसका एक स्कैन लिया जाता है ताकि उसकी एक डिजिटल जानकारी कंप्यूटर के दिमाग में बैठ सके और आदेश अनुसार कंप्यूटर आगे कार्य कर सकें याद रखे एक एस्केनर किसी भी दस्तावेज या फोटो को डिजिटल जानकारी के रूप में बदलता है वहीं दूसरी जगह एक फोटो केवल आपके सामने रखी हुई चीज की हूबहू नकल होती है। 

निष्कर्ष 

उम्मीद करते हैं ऊपर दी गई सभी जानकारी को ध्यानपूर्वक पढ़ने के बाद आप Scaner के बारे में सब कुछ समझ गए होंगे स्कैनर का आविष्कार किसने कब और कैसे किया यह सभी जानकारी अगर आप इस लेख के जरिए समझ पाए हैं तो इसे अपने मित्रों के साथ भी साझा करें साथ ही अपने सुझाव और विचार हमें कमेंट में बताना ना भूले।

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