SDLC meaning in hindi एसडीएलसी मीनिंग इन हिंदी

आज हम आपको इस पोस्ट में SDLC इन हिंदी के विषय में जानकारी देने जा रहे हैं। SDLC का फुल फॉर्म क्या होता है, इसके अलावा जो भी इसकी महत्वपूर्ण पार्ट से उन सभी की जानकारी देने जा रहे हैं। आप जानते हैं कि किसी भी सॉफ्टवेयर को डिवेलप करने में जो स्टेप अर्थात जो प्रक्रिया पूरी की जाती है। उसी को ही सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट लाइफ साइकल कहा जाता है, इसीलिए आज इस लेख में इसके विषय में ही पूरी डिटेल आपको विस्तार पूर्वक बताने जा रहे हैं आप ध्यान पूर्वक इस लेख को जरूर पढ़ें…

SDLC क्या होता है?

सबसे पहले आपको बताना चाहेंगे कि एसडीएलसी क्या होता है। sdlc को हिंदी में सॉफ्टवेयर विकास जीवन चक्र कहते हैं। यह सॉफ्टवेयर के निर्माण के लिए एक प्रकार की व्यवस्थित प्रक्रिया होती है जो कि निर्मित सॉफ्टवेयर की गुणवत्ता में और उसकी शुद्धता को सुनिश्चित करती है। किसी भी सॉफ्टवेयर के निर्माण में यह एक व्यवस्थित प्रक्रिया होती है जिसका उपयोग सॉफ्टवेयर उद्योग के द्वारा सॉफ्टवेयर के डिजाइन डेवलपमेंट और परीक्षण के लिए होता है।

इसकी प्रक्रिया का उद्देश्य उच्च क्वालिटी वाले सॉफ्टवेयर तैयार करना जो ग्राहकों की अपेक्षाओं को पूरा कर सके। एचडीएलसी सॉफ्टवेयर जीवन चक्र मॉडल अमूर्त होता है। एसडीएलसी एक इनफार्मेशन सिस्टम के जीवन चक्र की एक्सप्लेनेशन भी करता है और डेटाबेस डिजाइन का एक मूलभूत घटक के रूप में जाना जाता है किसी भी सिस्टम को बनाने की जो प्रक्रिया होती है उस प्रक्रिया को एसडीएलसी सिस्टम डेवलपमेंट लाइफ साइकिल कहा जाता है।

SDLC फुल फॉर्म इन हिंदी

एसडीएलसी का हिंदी में फुल फॉर्म सॉफ्टवेयर विकास जीवन चक्र होता है और यह एक सॉफ्टवेयर का मूलभूत घटक के रूप में भी जाना जाता है। एचडीएफसी फुल फॉर्म इन इंग्लिश में “software development life cycle” है।

  • S – software
  • D-  development
  • L –  life 
  • C – cycle

SDLC के प्रकार

जब भी किसी सॉफ्टवेयर पर स्कोर एप लाइक करते हैं तब sdlc को ” एप्लीकेशन डेवलपमेंट लाइफ साइकिल कहा जाता है कुछ एसडीएलसी मॉडल्स कम से कम पांच स्टेज वाले होते हैं और कुछ 10 तक भी पहुंच जाते हैं। एक टिपिकल एसडीएलसी फ्रेमवर्क जिसका इस्तेमाल सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन को बनाने के लिए होता है। उनमें सात स्टेज जरूर शामिल किए जाते हैं।

किसी भी सॉफ्टवेयर सिस्टम को डिवेलप करने के लिए सात प्रकार के स्टेप से गुजरना पड़ता है जो कि निम्न है..

1. Planning

प्लानिंग पेज में सॉफ्टवेयर को क्या आप achieve कराना चाहते हैं या फिर उसके goals क्या होते हैं, इसी के बारे में आपको बताना चाहते हैं। प्लानिंग phase सॉफ्टवेयर की क्वालिटी रिक्वायरमेंट तथा डिस्क आईडेंटिफिकेशन को शामिल किया गया है। इस फेज में आपके लिए की जो प्रजेंट समय में सॉफ्टवेयर होता है।

वह अपना काम सही तरीके से कर रहा है या फिर नहीं कर रहा। अगर वह सही से इतना काम नहीं कर रहा तो उस को बदलने की जरूरत नहीं पड़ती है। इसमें आप cost को evaluate कर सकते हैं। सिस्टम को डिजाइन करने में कितने कोस्ट की आवश्यकता होती है यह सब आपको प्लानिंग पेज में ही दिख जाएगी।

2.Analysis 

प्लानिंग फेस में प्रॉब्लम्स को डिफाइन कर दिया जाता है तथा एनालाइजर्स पेज में उन सभी प्रॉब्लम को डिटेल्स के साथ में एग्जामिन करते हैं। एनालिसिस फेज में यूजर के रिक्वायरमेंट को भी देखा जाता है कि एंड यूजर्स की क्या क्या आवश्यकता है हैं इस पेज में सिस्टम के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को अच्छे से स्टडी करते हैं और एंड यूजर तथा डिजाइनर दोनों मिलकर प्रॉब्लम एरिया को सॉल्व करते हैं।

3.Details system design

डिटेल सिस्टम डिजाइन फेज के अंदर डिजाइन सिस्टम की प्रोसेस के डिजाइन को पूरा कर दिया जाता है सिस्टम में पूरी टेक्नोलॉजी specifications को भी इंक्लूड करते है। इससे सिस्टम और भी ज्यादा इंटरएक्टिव और efficient बन जाता है।

4. Building

बिल्डिंग स्टेज में बड़ी मात्रा में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट प्रोसेस को टिपिकली शामिल कर लिया गया है। सोर्स कोड की प्रोग्रामिंग ग्राफिक क्रिएट करना और असेस्ड को कंप्लेंट करना एक एग्जीक्यूटेबल प्रोग्राम में इनको भी इसमें शामिल किया गया है। एक सिंगल प्रोग्राम छोटे प्रोजेक्ट में शामिल होते हैं माही बड़े प्रोजेक्ट में एक साथ कई टीम काम कर सकती है उदाहरण के लिए एक टीम डिजाइन करती है यूजर इंटरफेस को करता है और दूसरी तरफ टीम सोर्स कोड के द्वारा लिखा जाता है।

5.Implementation

इससे के अंतर्गत हार्डवेयर डी बीएमसी सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन प्रोग्राम को इंस्टॉल करते हैं इसके बाद डेटाबेस को डिजाइन को implement कर दिया जाता है इससे पहले डेटाबेस डिजाइन को इंप्लीमेंट किया जाए तो उस सिस्टम कॉल टेस्टिंग कोडिंग और डबिंग प्रोसेस से भी होकर गुजरना पड़ता है। यह एसडीएलएस में सबसे लंबा चलने वाला फेज होता है।

6. Maintenance 

मेंटेनेंस sdlc का सबसे अंतिम चरण होता है। जब सिस्टम आता तो सॉफ्टवेयर तैयार हो जाता है तो जो यूजर से उसका प्रयोग करना शुरू कर देते हैं उसके बाद में जो प्रॉब्लम आती है। उनको टाइम टू टाइम कॉल करना पड़ता है। तैयार सॉफ्टवेयर को समय के अनुसार मेंटेन रखना, मेंटेनेंस कहलाता है। मुख्य रूप से एसडीएलएस में तीन प्रकार के मेंटेनेंस होते हैं।

  • Corrective maintenance
  • Adaptive maintenance
  • Perfective maintenance

7.Testing

टेस्टिंग फेज में डेवलपर खोजने की कोशिश करते हैं सभी प्रकार केunknown issues फिक्स कर लेते हैं कि किसी bugs को जो प्रोग्राम में उत्पन्न होते हैं उनकी टेस्टिंग की जाती है इंटरनल वही सॉफ्टवेयर की एक beta वर्जन को यह प्रदान की जाती है। एक ग्रुप ऑफ़ यूजर्स को पब्लिक टेस्टिंग करने के लिए उपयोग किया जाता है।

Conclusion

आज हमने इस पोस्ट में आप सभी को “SDLC क्या होता है?” इसके विषय में जानकारी प्रदान की है। हमें उम्मीद है कि जो भी आपको इससे जुड़ी हुई जानकारी है जरूर पसंद आएगी। इसी तरह की जानकारियों के लिए आप हमारी वेबसाइट पर कंटिन्यू विजिट कर सकते हैं, और आप इस लेख से संबंधित किसी भी सवाल के लिए या आपको यह पोस्ट पसंद आए तो कमेंट सेक्शन में जाकर एक बार कमेंट करके जरूर बता दे।

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