भगवान शिव के रहस्य Secrets of Lord Shiva

हमारे हिंदू धर्म अर्थात सनातन धर्म के तीन मुख्य देवता माने गए हैं जिनका प्राचीन धर्म ग्रंथों में भी वर्णन सुनने को पता है वह तीन प्रमुख देवता ब्रह्मा विष्णु महेश माने जाते हैं इन तीनों ही देवों के कुछ ना कुछ इस तरह के रहस्य बने हुए हैं जिनके बारे में शायद लोगों को बहुत कम जानकारी है ब्रह्मा की उत्पत्ति भगवान विष्णु की नाभि से हुई थी वही शिव की उत्पत्ति को लेकर लोगों की अलग-अलग धारणाएं जुड़ी हुई हैं लेकिन सटीक जानकारी लोगों को नहीं पता है।

भगवान शिव के रहस्य Secrets of Lord Shiva

आज हम आपको कुछ ऐसी जानकारी देने वाले हैं भगवान शिव के बारे में जिनको जानकर शायद आपको आश्चर्यचकित भी होना पड़ सकता है क्योंकि सभी देवताओं के बारे में थोड़ी जानकारी सभी लोग रखते हैं लेकिन कुछ रहस्य उनके जीवन के ऐसे होते हैं जिनके बारे में शायद लोगों को जानकारी नहीं है तो चलिए जानते हैं कि भगवान शिव से जुड़े हुए वह महत्वपूर्ण रोचक कहानी तथ्य उनके बारे में…

कालों के महाकाल भगवान भोलेनाथ

भगवान शिव और पार्वती के पति शंकर इनको महादेव भोलेनाथ आदिनाथ कालों के काल महाकाल भोले भंडारी बहुत से नामों के द्वारा पुकारा जाता है क्योंकि भगवान शंकर का जैसा नाम है वैसा ही उनका स्वभाव है और वह इस पृथ्वी लोक के स्वामी भी हैं जिस तरह से ब्रह्मा जी ब्रह्मलोक के स्वामी हैं विष्णु भगवान बैकुंठ के स्वामी है।

 उसी तरह भगवान शिव सृष्टि के संहारक माने जाते हैं। इसीलिए उनका रहन-सहन वेशभूषा सब कुछ बाकी देवताओं से एकदम अलग है। बहुत साधारण तरीके से रहने वाले भगवान भोलेनाथ उनका निवास स्थान भी श्मशान घाट में होता है। इसीलिए भोले का एक नाम कालों के महाकाल भी है। क्योंकि भगवान से कि अगर आराधना सच्चे मन से की जाए तो ऐसा माना जाता है कि इंसान अपनी मौत को भी टाल सकता है इसलिए उनको कालों के काल भी कहा जाता है।

भगवान शिव की धरती पर अनेकों अवतार हुए हैं जब-जब यहां पर अत्याचार बढ़े हैं और राक्षसों का अवतार हुआ है तब भगवान शिव गए अनेकों अवतारों लेकर सभी राक्षसों का नाश किया है। भगवान शिव के शास्त्रों में अनेकों नामों का वर्णन किया गया है। शिव पुराण के अनुसार 108 भगवान के नाम जो उनको अति प्रिय हैं उनका वर्णन अधिक देखने को मिलता है।

सभी धर्मों का केंद्र “भगवान शिव

भगवान भोलेनाथ की वेशभूषा ऐसी है कि सभी धर्म के लोग उन्हें अपना प्रतीक ढूंढ सकते हैं दूसरे के यजीदी साइबीन शुभी ब्राहिमी इत्यादि धर्मों में भी शिव के होने की स्पष्ट छाप देखी जा सकती है भगवान शिव के शिक्षकों की ऐसी परंपरा शुरुआत से ही रह गई है जो आगे चलकर सिद्ध नाथ,शैव, सूफी, आदि संप्रदाय में बट गई थी।

देवता और असुर के प्रिय शिव

भगवान भोलेनाथ जहां एक तरफ देवताओं के भी प्रिय हमेशा रहे हैं और असुर, दानव, राक्षस, पिता, गंधर्व, यक्ष आदि सभी भी भगवान शिव को पूजते हैं। एक तरफ रावण को भी भगवान शिव ने वरदान दिया दूसरी तरफ राम को भी उन्होंने वरदान दिया। इसके अलावा भस्मासुर, शुक्राचार्य ऐसे बहुत से असुरों को उन्होंने वरदान दिया था भगवान शिव आदिवासी वनवासी जाति व धर्म समाज आदि देवताओं के रूप में माने जाते हैं।

शिवलिंग क्या है

हिंदू धर्म में शिवलिंग पूजन को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है शिव का अर्थ कल्याणकारी और लिंग का अर्थ सृजन होता है शिवलिंग दो तरह के होते हैं पहला उल्कापिंड के जैसे काला अंडाकार रूप में होता है इसको ज्योतिर्लिंग कहते हैं। 

मान्यताओं के अनुसार एक विशाल अलौकिक अंडाशय होता है। जिसका तात्पर्य ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है। इस पूरे ब्रह्मांड को प्रतीक के रूप में मान लिया गया है यहां पुरुष और प्रकृति का जन्म हुआ है तो वहीं दूसरी तरफ शिवलिंग इंसान के द्वारा पारे से भी बनाए गए हैं उनको पारद शिवलिंग कहा जाता है।

शिव की उत्पत्ति कैसे हुई

भगवान शिव को स्वयंभू माना जाता है। अर्थात भगवान शिव का धर्म नहीं हुआ है भगवान शिव अनादि काल से ही इस सृष्टि में मौजूद है लेकिन भगवान शिव की उत्पत्ति के विषय में अलग-अलग तरह की कथाएं सुनने को मिलते हैं जैसे पुराणों में भगवान शिव भगवान विष्णु के तेज से उत्पन्न हुए। इस वजह से महादेव हमेशा योगमुद्रा में ही रहते हैं।

 वही श्रीमद् भागवत के अनुसार जब भगवान विष्णु ब्रह्मा अहंकार के वश में आ गए और अपने आप को श्रेष्ठ बताते हुए लड़ रहे थे। तब एक जलते हुए खंबे में से भगवान शिव प्रकट हुए विष्णु पुराण में भगवान शिव की उत्पत्ति के विषय में लिखा गया है कि ब्रह्मा जी ने जब तपस्या की तो उनकी तपस्या की वजह से ब्रह्मा जी की गोद से रोते हुए बालक भगवान शिव प्रकट हो गए थे।

भगवान शिव पर भस्म लगाने का कारण

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को भस्म अति प्रिय है। इसके पीछे बहुत बड़ा कारण माना जाता है ऐसा माना गया जब माता सती भगवान शिव से बिना पूछे अपने मां पिता के घर चली गई थी। तब वहां उन्होंने खुद का और भगवान शिव का अपमान होते हुए देखा। इस वजह से उन्होंने अपने आप को योग अग्नि प्रकट करके भस्म कर दिया था अर्थात अपने शरीर को जला दिया था।

इस कारण भगवान शिव बहुत क्रोधित हो गए और उन्होंने भयंकर रूप कर लिया था क्योंकि माता सती से भगवान शिव बहुत अधिक स्नेह करते थे। इसीलिए भगवान शिव ने अपने पूरे शरीर में उस हवन कुंड की भस्म को जो माता सती की थी तो अपने शरीर पर उसको लगा लिया था इसीलिए भगवान शिव को भस्म अति प्रिय है क्योंकि माता सती का अपने पास होने का एहसास होता है तभी से ही शिव को भस्म चढ़ाई जाने लग गई।

निष्कर्ष

हमने इस पोस्ट के बदलते आप सभी को भगवान शिव के बारे में जानकारी प्रदान की है। उनके जीवन से जुड़े हुए कुछ ऐसे रहस्य के बारे में बताया है जो शायद आपने कभी सुना नहीं होगी। हमें उम्मीद है कि जो भी जानकारी आपको इस लेख के माध्यम से किया गया आपको जरूर पसंद आएगी। इसी तरह की जानकारियों है जुड़े रहने के लिए आप हमारी वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं और यह पोस्ट पसंद आए तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं।

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