what is compressor? कंप्रेसर क्या होता है

आज हम आपको इस लेख में बताना चाहेंगे कि कंप्रेसर मीनिंग इन हिंदी अर्थात कंप्रेसर क्या होता है। इसके विषय में पूरी जानकारी विस्तार पूर्वक बताने जा रहे हैं। अक्सर आपने अपने चारों तरफ कहीं ना कहीं कंप्रेसर इस्तेमाल होते हुए देखे होंगे। कंप्रेसर का इस्तेमाल कैसे किया जाता है।  कंप्रेसर के बारे में जो भी इंफॉर्मेशन है,शायद बहुत कम लोगों को मालूम होगी। इसीलिए आज हम आपको इस लेख के माध्यम से कमप्रेशर मीनिंग इन हिंदी के विषय में जानकारी दे रहे हैं..

what is compressor? कंप्रेसर क्या होता है

कंप्रेसर शब्द से तो आपको पता ही चल गया होगा कि इसका इस्तेमाल कैसे और कब किया जाता है। थोड़ी जानकारी तो शायद आपको पता ही होती है। क्योंकि कंप्रेशर का इस्तेमाल अक्सर एयर को कंप्रेस करने के लिए किया जाता है। कंप्रेसर का इस्तेमाल अक्सर आप ने अपने घर में फ्रिज, एसी में देखा होगा।

 आखिर इन चीजों में कंप्रेसर का इस्तेमाल क्यों होता है। इसके विषय में ही आज आपको बताने जा रहे हैं। आखिर कंप्रेशन होता क्या है, और कंप्रेसर कितने प्रकार के होते हैं, कंप्रेसर के पार्ट कितने होते हैं, इन्ही के विषय मे जरूर आपके मन में यह सवाल आ रहे होंगे इसीलिए बिना समय खराब किए हम आपको प्रेशर के विषय में जानकारी देने जा रहे हैं, आइये जानते हैं..

कंप्रेसर क्या होता है?

कंप्रेसर एक प्रकार की मैकेनिकल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होती है। जिसका उपयोग गैस या एयर के प्रेशर को बढ़ाने के लिए लोग करते हैं। एयर मुख्य रूप से कंप्रेसिबल होता है, इसलिए कंप्रेसर के इस्तेमाल से एयर के प्रेशर को बढ़ाया जाता है और उसके वॉल्यूम को कम कर दिया जाता है।

इनके बहुत से एप्लीकेशन जैसे रेफ्रिजरेटर एयर कंडीशनर इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन में जहाँ pneumatic actuators का इस्तेमाल होता है। 

सभी इलेक्ट्रॉनिक एप्लीकेशंस में अलग-अलग तरह के कंप्रेसर का प्रयोग होता है और अलग तरह से ही यह सभी काम करते हैं कंप्रेसर के समान बेसिक प्रिंसिपल भी होते हैं। लेकिन डिफरेंट एप्लीकेशन में इनकी वर्किंग भी अलग-अलग तरह से होती है।

कंप्रेसर का components 

एक कंप्रेशन के को मेन components होते हैं जो मुख्य रूप से पहला पावर सोर्स और दूसरा mechanism of कंप्रेशन।

उदाहरण के लिए जब एक कंप्रेसर तभी काम करता है। जब एयर उसमें एंटर करता है तो पिस्टन से और इसको इनकरेड रिफ्रेशर और डिस्कवर्ड वॉल्यूम से कंप्रेस्ड कर दिया जाता है। जब एक बार इसमे एयर अधिकतम प्रेशर हो जाती है। तब built in mechanism air intake स्विच off हो जाता है।  यह कंप्रेसर एयर की फिर usable बन जाता है जैसे-जैसे इसकी एयर इस्तेमाल होती है तो प्रेशर डिक्रीज हो जाता है दूसरा बिल्ट इन स्विच और ज्यादा एयर को अंदर आ जाने देता है और इससे प्रोसेस दोबारा से चालू होने से स्टार्ट हो जाता है।

कंप्रेसर के प्रकार

वैसे तो देखा जाए कंप्रेसर बहुत प्रकार के सभी एप्लीकेशन के हिसाब से अलग-अलग होते हैं लेकिन मुख्य रूप से दो बहुत महत्वपूर्ण होते हैं..

1.Dynamic कंप्रेशन

जब हम डायनामिक की बात करते हैं तो उसमें कुछ और सोच के बारे में पता चलता है कि इस तरह की मौसम इस में उत्पन्न होती है जिससे इस केस में यह होता है कि डायनेमिक कंप्रेसर एयर के मोमेंट को डील कर देता है इस तरह से कंप्रेसर में rotating impeller की मदद से डायनेमिक मोमेंट जनरेट किया जाता है। 

जोकि फ्लोइंग एयर के प्रेशर को बढ़ा देता है। डायनामिक कंप्रेसर की ज्यादा एप्लीकेशन आपको पेट्रोलियम व केमिकल इंडस्ट्रीज में मिलेंगी। यहां पर कंटीन्यूअस काम की जरूरत पड़ता है और यह काम लंबे समय तक के लिए होता है। उसके लिए डायनेमिक कंप्रेसर को तो सब कैटेगरी में बांटा जाता है, पहला centrifugal व axial कंप्रेसर।

2.positive displacement

जैसा कि उसके नाम से ही स्पष्ट हो रहा है कि पॉजिटिव डिस्प्लेसमेंट कंप्रेशर मैं यह काम करता है लोड को डिस्प्ले करके किसी मैकेनिक के उपयोग में या किसी छोटे मैकेनिकल लिंक जैसे गियर्स, पिस्टन व rotors आदि के उपयोग करने से यह कंप्रेस करता है छोटे छोटे अमाउंट केयर को एक साइड से इंटर करके दूसरी साइड से हाई प्रेशर में निकालती है। 

इसी के बीच एयर को बहुत से मैकेनिकल linkages से भी गुजरना होता है। इस पॉजिटिव डिस्प्लेसमेंट कंप्रेसर को दो हिस्सों में बांट दिया जाता है एक rotary ओर दूसरी reciprocating कंप्रेसर।

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पंप व कंप्रेशर में अंतर

पंप और कंप्रेशर दोनों की hydraulic machines होती है जिनको फ्लूड की एनर्जी को बढ़ाने के लिए उपयोग में लेते हैं। दोनों डिवाइस को इंडस्ट्रीज और डोमेस्टिक काम के लिए प्रयोग में लिया जाता है। पंप एक ऐसा डिवाइस है जिसमें फ्लूड को मूव कर दिया जाता है। और उसकी इनोवेशन को बढ़ा दिया जाता है। इसका अधिकतर इस्तेमाल फ्लूड को सप्लाई करने के लिए होता है। लो इनोवेशन से हाय elevation तक इसको प्रयोग में लेते है।

वहीं दूसरी तरफ कंप्रेसर एक ऐसा डिवाइस है जिसमें पंप की तरह मैकेनिकल डिवाइस लगा होता है। लेकिन fluid की potential एनर्जी को closed कंटेनर में कंप्रेस करके ये बढ़ा देता है।

इन दोनों में मेन डिफरेंस यह है कि दोनों में ही पंप का उपयोग होता है fluid की काइनेटिक एनर्जी को बढ़ाने के लिए जो कि बाद में उसकी प्रेशर एनर्जी को भी बढ़ा देती है। लोड को एक जगह से दूसरी जगह पर लाने में यह मदद भी करता है लेकिन कंप्रेसर का ज्यादा इस्तेमाल फ्लोर की पोटेंशियल एनर्जी को बढ़ाने के लिए होता है।जिसके लिए इनको प्रेशराइज करके कंटेनर में डाल दिया जाता है।

इनका इस्तेमाल फ्लोर को कंप्लीट करने के लिए भी होता है जिसके लिए इनकी वॉल्यूम को बढ़ा दिया जाता है जिससे प्रेशर तो इनक्रीस होती है इसके अलावा इनकी density भी बढ़ जाती है।

निष्कर्ष

आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से “कंप्रेशर क्या होता है” इसके विषय में जानकारी प्रदान की है। हमें उम्मीद है कि आपको जो भी इंफॉर्मेशन इस लेख में दिए है वह जरूर पसंद आई होगी। अगर आप इसी तरह की जानकारियों से जुड़ना चाहते हैं तो आप अपनी वेबसाइट पर कंटिन्यू बने रहिए और आप को हमारा लेख पसंद आया तो एक बार कमेंट करके जरूर बताएं।

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