When is Holi in 2025? 2025 में होली कब है?

दोस्तों आज हम आपको बताने वाले हैं कि 2025 में होली कब आएगी उसका शुभ मुहूर्त क्या है। जैसा कि आप सब भली भांति जानते हैं कि हिंदू पंचांग के अनुसार होली का जो त्यौहार चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। होली प्रतिपदा तिथि के 2 दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। अर्थात होली फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा और द्वितीय तिथि तक चलती है। पूरी तरह से यह त्यौहार 3 दिनों तक चलता है।

 वैसे होली की शुरुआत बसंत पंचमी से ही शुरू हो जाती है। उसको बसंतोत्सव या होली के तौर पर भी मनाते हैं। क्योंकि इस त्यौहार की शुरुआत बसंत ऋतु के आगमन की वजह से ही होती है। प्रकृति में फैले हुए रंगों की छटा को देखकर बसंत उत्सव की शुरुआत हो जाती है।बसंत ऋतु में प्रकृति के फैले हुए रंगों की रंग बिरंगी बाहर से ही होली के पर्व की शुरुआत को माना जाता है।

When is Holi in 2025? 2025 में होली कब है?

 भारत के सभी राज्यों में होली का त्योहार अलग-अलग रूप से मनाया जाता है। आज हम आपको इस आर्टिकल के द्वारा बताने वाले हैं कि 2025 में होली कब है, होली का महत्व क्या होता है, होली की शुरुआत कब से हुई थी इसके अलावा विभिन्न राज्यों के होली के त्योहारों के बारे में भी इस पोस्ट में आपको बताने जा रहे हैं, ताकि आपको इसके विषय में पूरी जानकारी सही ढंग से प्राप्त हो सके तो चलिए जानते हैं 2025 में होली कब है…

होली का इतिहास

वैसे तो होली का इतिहास बहुत ही प्राचीन माना जाता है यह हिंदुओं का बहुत बड़ा और प्रमुख त्यौहार है। हिंदू पंचांग के अनुसार होली का त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। होली के त्यौहार का वर्णन हमारे प्राचीन ग्रंथों में भी देखने को मिलता है। नारद मुनि पुराण,भविष्य पुराण जैसे पुराणों में और प्राचीन हस्तलिपि ओं में भी होली का वर्णन मिलता है। दूसरी तरफ विंध्य क्षेत्र के रामगढ़ स्थान पर इसा पूर्व 300 साल से पुराने एक अभिलेख में भी होली का उल्लेख देखने को मिला है।

इसके अलावा हमारे देश में अनेकों कवियों जिनमें मुख्य रुप से मुस्लिम कवियों ने भी अपनी कविताओं में होली के त्योहारों का वर्णन किया है। यह इस बात का प्रमाण है कि होली केवल हिंदू ही नहीं बल्कि मुसलमान लोग भी कहीं ना कहीं मनाते हैं। मुगल काल में तो राजा महाराजा अकबर हुमायूं, जहांगीर,आदि राजा होली के त्यौहार की तैयारी बहुत धूमधाम से करते थे। Also Read: रामनवमी क्यों मनाई जाती है? रामनवमी का इतिहास हिंदी में?

2025 में होली मुहूर्त

मुख्य रूप से होली का त्योहार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। पूर्णिमा तिथि को होली के मुख्य पर्व के रूप में मनाया जाता है। इसके दूसरे दिन चैत्र प्रतिपदा को धुलण्डी के रूप में मनाते हैं। इस दिन सभी लोग रंगों से होली को खेलते हैं। एक दूसरे को गले मिलते हैं 2025 में होली का त्यौहार 14 मार्च 2025 को शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। 

होली के त्यौहार को मुख्य रूप से बसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करने के लिए भी मनाते हैं। बसंत ऋतु में प्रकृति के विभिन्न रंगों की छटा चारों तरफ दिखाई देती है। इसीलिए होली का त्यौहार मनाया जाता है। मुख्य रूप से हिंदू धर्म में इस त्यौहार का बहुत अधिक महत्व भी है। और बड़े धूमधाम के साथ इस त्योहार को मनाते भी है।

होली से जुड़ी हुई पौराणिक कथा

होली से जुड़ी हुई मुख्य रूप से बहुत ही पौराणिक कथाएं हैं लेकिन इसमें प्रमुख हिरण्यकश्यप और प्रहलाद की भगवान राधा कृष्ण की लीलाएं और राक्षसी दुण्डा की कथा आदि से जुड़ी हुई प्रमुख पौराणिक कथा मानी जाती हैं। फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होली के दिन बुराई पर अच्छाई की जीत को याद करते हुए होलिका का दहन होता है।

 कथा के अनुसार हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु के बहुत बड़े भक्त थे। लेकिन यह बात उसके पिता को बिल्कुल पसंद नहीं थी इसीलिए उन्होंने भगवान की भक्ति से प्रहलाद को विमुख करने के लिए अपनी बहन होलिका को प्रहलाद जी को जलाने के लिए कह दिया। होलिका के पास एक वरदान स्वरूप चुनरी थी। जिससे वह अपने शरीर को जला नहीं सकती थी। इसीलिए होलिका प्रहलाद को मारने के उद्देश्य से अपनी गोदी में लेकर बैठ गई थी। 

भगवान की कृपा से भक्त पहलाद तो बच गया। लेकिन होली का उसमें जलकर भस्म हो गई थी। उस अग्नि के प्रभाव से भी भगवान की कृपा से प्रहलाद के शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। इसीलिए होलिका दहन की कथा होली से जुड़ी हुई पौराणिक कथा है। इसलिए होली का त्यौहार तभी से अच्छाई पर बुराई की जीत के लिए मनाया जाने लग गया।

राधा कृष्ण के पवित्र प्रेम को याद में रखते हुए होली के दूसरे दिन धूलंडी को बरसाने की मुख्य होली के रूप में मनाते हैं। कहते हैं भगवान कृष्ण मैं एक बार माता यशोदा से पूछा कि वह राधा की तरह गोरे क्यों नहीं लगते हैं तो उनकी मां ने कहा कि राधा के चेहरे पर रंग लगा दो। इससे तुम्हारा रंग भी राधा जी की तरह काला हो जाएगा। यह सुनकर कृष्ण भगवान राधा और उनकी गोपियों के साथ होली खेलने के लिए बरसाने चले गए। वहा की लट्ठमार होली बहुत प्रसिद्ध होली है। 

 विभिन्न राज्यों में होली का पर्व

भारत के सभी राज्यों में होली का त्योहार अलग-अलग प्रकार से मनाया जाता है। मध्यप्रदेश के मालवा में अंचल होली में पांचवे दिन रंग पंचमी के रूप में मनाई जाती है। यह होली के मुख्य त्यौहार से भी बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। इसके अलावा बरसाने की लठमार होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। मथुरा वृंदावन में पूरे 15 दिन तक होली की धूम बड़ी मची रहती है। इसके अलावा हरियाणा, महाराष्ट्र, दक्षिणी गुजरात आदि सभी जगह पर होली का विशेष महत्व है।

निष्कर्ष

आज हमने आपको इस आर्टिकल के द्वारा 2025 में होली कब है? इसके बारे में जानकारी दी है। उम्मीद है जो आपको जानकारी दी है वह पसंद आई होगी। इसी तरह की जानकारियों से आप हमारी वेबसाइट से कंटिन्यू रह सकते हैं।इसके अलावा अगर आपको यह पोस्ट पसंद आए तो कमेंट करके जरूर बताएं।

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